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भारत छोड़ो आंदोलन के साथ बिहार का योगदान।

 सन 1अप्रैल 1937 मुहम्मद यूनुस ने प्रथम भारतीय मंत्रिमंडल बिहार में स्थापित किया। जबकि जयप्रकाश नारायण, बसावन सिंह और रामवृक्ष बेनीपुरी इसके विरोध प्रदारसन करने लगे थे।



फिर जब 1941 में महात्मागांधी ने जब सम्प्रदाय तत्वों के विरोध सत्यग्रह किया तो इसके समर्थन में बिहार के महिलाएं भी साथ दी थी।


और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन को सफल बनाने के लिए बिहार कि शेरनी महिलाओ ने खादी आंदोलन में भी बढ़ चढ़ कर हिसा लिया। इनमे सारदा देवी, सावित्री देवी, लीला सिंह , श्रीमती सफी, सारदा कुमारी,  ..आदि। 

पटना के हजारीबाग में जब महिलाओ की नेतृत्व सरस्वती देवी कर रही थी जिन्हें ग्रिफ्तार कर लिया गया हालांकि भागलपुर जेल ले जाते समय विद्यार्थियों ने अपनी बहादुरी दिखाकर उनको मुक्त करा दिया।


 छपरा जिला

वही छपरा जिला के दिघवारा प्रखंड पर तिरंगा फहराने के आरोप में दो सगी बहने सारदा कुमारी और सरस्वती कुमारी को 14 और 11 वर्ष की सजा सुनाई गयी।

जगदीश सिंह  जो छपरा जिला के माझी थाना क्षेत्र के मझनपुरा गांव के मूल निवासी थे उनका योगदान और वलिदान ने भी अहम भूमिका निभाई। इन्होंने अंग्रेजों की दी हुई बहुत यातनाये, हर प्रकार की कस्टो को झेला।

17अगस्त 1942  का ओ दिन जब सिताब दियारा निवाशी महेंद्र नाथ सिंह की अगुवाई में अंग्रेजो के हुकूमत के खिलाफ मैदान में हजारों सेनानियों ने माझी थाना, पोस्ट ऑफिस , रेलवे स्टेशन को आग के हवाले कर दिया। माझी-बलिया रेल लाइन को उखाड़ कर यातायात बंद कर दिया।




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